आसमां में नई उड़ान देखेगे ( Aasman Main Nae Udaan Dekhege )

आसमां में नई उड़ान देखेगे,
अब हम नया जहां देखेगे।

बढ़ चले हैं तरक्की की राह पर,
हर पल नया इम्तिहान देखेगे।

बुजुर्गो की सीख को साथ लेकर,
अपनी दुनिया का नया आयाम देखेगे।

कलाम साहब के सपनों को सच कर के,
दुनिया से अलग हिंदुस्तान देखेंगे।

कलाम साहब की पुण्यतिथि पर छोटी सी रचना

© देवर्षि मेहता”जुगनू “00g

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