कोई क्या चाहता हैं ( Koi Kya Chahta Hai )

जिन्दगी में कब कोई क्या चाहता हैं,
अगर रोता हैं बच्चा तो बस माँ चाहता हैं।

इबादत हैं उस खुदा से अगर समझे,
ये इंसां हैं जमीं का आसमां चाहता हैं।

रूबरू होउगा एक दिन उससे कुछ सवाल पूछने हैं,
क्या खेल हैं उसका वो क्या चाहता हैं।

ये तेरा घर हैं तेरा ही रहेगा “जुगनू”,
जाने वो कौन अनजान हैं जो तेरा पता चाहता हैं।

एक कतरा इश्क ही हैं जीने के लिए काफी,
अब इससे ज्यादा और कोई क्या चाहता हैं।

© मेहता देवर्षि “जुगनू”

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