क्या होगा? (Kya hoga)

अब इससे बड़ा जलजला क्या होगा,
अपने बिछड़ जाने का सिलसिला क्या होगा।

आओ बेठो कुछ बात करु मैं तुमसे,
मैं अकेला ही चला तो काफिला क्या होगा।

जिसके संग सोचा ही नही था ज़िन्दगी का एक भी पल,
अगर वो बिछड़ भी गया तो गिला क्या होगा।

आबाद कर के तो गई हैं मुझको मोहब्बत तेरी,
समझ नही आता मुझे छोड़ के उसे मिला क्या होगा।

© मेहता देवर्षि ‘जुगनू’