पुरा पुरा चाँद हैं आज आसमान में

पुरा पुरा चाँद हैं, आज आसमान में,
आजा पिया तुझको देखु जी भर के,
इस चाँद की नुमाइश में, लम्हे की फरमाइश हैं,
भीनी भीनी चाँदनी का आज आभास हैं,
निगहबां जो तू हैं उस चाँद को बता,
पुरा पुरा चाँद हैं, आज आसमान में,
आजा पिया तुझको देखु जी भर के,

वो चाँद जो बादलों में छुप रहा हैं,
मेरा चाँद मेरी तरफ रुख कर रहा हैं,
इस चाँदनी रात में,
प्यार की सौगात ले,
महकी हुई चाँदनी की आज महकांस हैं।
पुरा पुरा चाँद हैं, आज आसमान में,
आजा पिया तुझको देखु जी भर के,

पनघटों पे चाँदनी की हसीं छटा छाई हैं,
कान्हा और राधिका सी प्रीत उभर आई हैं,
दिल के सारे जज़्बात से,
लफ़्ज़ों के अल्फ़ाज़ से,
श्याम तेरी मुरलिया से रात आबाद हैं।
पुरा पुरा चाँद हैं, आज आसमान में,
आजा पिया तुझको देखु जी भर के,

Copyright देवर्षि मेहता “जुगनू”

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तुम शब्द कहो मैं गीत लिखू (Tum Shabd Kaho main Geet Likhu)

तुम शब्द कहो मैं गीत लिखू,

मेरे मन की मैं प्रीत लिखू,

अपनी दुनिया मे तुमको मैं

अपने मन का मनमीत लिखू,

 

कुछ शब्द हो भरी जवानी से,

कुछ अल्हड सी मस्तानी से,

कुछ यादों से,कुछ बातों से,

कुछ लम्हो से, लम्हादो से,

कुछ शब्दो में सपने सुहाने हो,

कुछ में बीतें अफ़साने हो,

कुछ में अहसास पिरोए हो,

सपने सब खास संजोए हो,

उन शब्दों से अपनी अलग,

जीवन की में रीत लिखू,

तुम शब्द कहो मैं

 

कुछ शब्दों में हो गीत राग,

और कुछ शब्दों में दीप फाग,

कोई शब्द हो बीती कहानी से

जब आँख भरी हो पानी से,

कुछ शब्द में बीता बचपन हो,

जग से बेबाक लड़कपन हो,

कुछ शब्द लगे इन अधरों से,

लगे बांसुरी फिर महके,

कान्हा के मुख से लगा हुआ,

क्या तुमको मैं नवनीत लिखू।

तुम शब्द कहो मैं

 

©देवर्षि मेहताजुगनू

किसी की अदाओ पे फिदा हो जाना (kisi ki adao pe fida ho jana)

किसी की अदाओ पे फिदा हो जाना,
इश्क़ करना यानी इश्क़ में फना हो जाना,

अपनी किस्मत तो यही लिख दी खुदा ने,
फिर कहाँ रोज का आना जाना।

हाथ दोनो तरफ से बढ़ने चाहिये,
तुम अपने हिस्से का तो निभाते जाना,

हमारे मिलने का सिलसिला तो मुसलसल चलता रहेगा,
फिर क्यों इन रस्मो रिवाजो से परे जाना,

अपनी हिम्मत का तू भरम रख ले “जुगनू”
फर्श से अर्श तक खुद को पहुँचा जाना।

© देवर्षि मेहता “जुगनू”

क्या होगा? (Kya hoga)

अब इससे बड़ा जलजला क्या होगा,
अपने बिछड़ जाने का सिलसिला क्या होगा।

आओ बेठो कुछ बात करु मैं तुमसे,
मैं अकेला ही चला तो काफिला क्या होगा।

जिसके संग सोचा ही नही था ज़िन्दगी का एक भी पल,
अगर वो बिछड़ भी गया तो गिला क्या होगा।

आबाद कर के तो गई हैं मुझको मोहब्बत तेरी,
समझ नही आता मुझे छोड़ के उसे मिला क्या होगा।

© मेहता देवर्षि ‘जुगनू’

 

जीना चाहु ( Jeena Chahun )

First Song Composed by me,

You can download audio by this Link:

http://awesong.in/jeena-chahoon-original-devershi-mehta-tanmay-choubisa-prachi-nagda/

you can watch full song on YouTube on this link:

Lyrics:

मैं तुझको जीना चाहु,
तू मुझको जीना चाहे,
अब बन गई हैं दास्तां हम दोनों के दरमियां,

मैं तुझको जीना चाहु,
तू मुझको जीना चाहे,
अब दिल पे दिल हो गए हैं मेहरबां,

रिश्तो की अनकही सी इक डोर जुड़ गई,
जा रही थी ज़िन्दगी कहाँ… तेरी और मुड़ गई,
बरसी बारिश यहाँ पे,
महकी सारी फ़िज़ाए,
अच्छा लगा मुझको तेरे करीब आके…

मैं तुझको जीना चाहु,
तू मुझको जीना चाहे,
अब बन गई हैं दास्तां हम दोनों के दरमियां,

Concept: Devershi Mehta
Direction: Sawan Dosi
Voice: Tanmay Choubisa & Prachi Nagda
Cast: Tanmay Choubisa, Versha Kotwal, Dhawal Tak & Harsha Tak
Camera and Video: Pavitar Singh, Ankit Sharma
Editing: Nihal Nandwana
Sound Arrangement: Arpan Jain
Music and Lyrics: Devershi Mehta

© Devershi Mehta

तुमको याद किया हैं मैंने (Tumko Yaad Kiya Hai Maine )

याद करो वो सावन के दिन,

याद करो एक दुझे के बिन,

एक पल नही चला करता था,

मावस हो या पूनम हर दिन,

जीवन नही कटा करता था,

अब इस क्षण विलक्षण तुम बिन,

तुमको बहुत जिया हैं मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

मेरी छोडो अपनी बतलाओ,

कुछ अपना संसार बताओ,

मुझसे अलग  रहकर  तुमने  क्या,

खुद अपना जीवन है  सवारा,

सांझ को मेरे गीत सुने क्या,

आंखों से क्या रुक गई धारा,

फिर भी आगे बढ़े हैं हम तुम,

बिना तुम्हारे व्यथित था ये मन,

इतना समय अब निकल चुका हैं,

रंग दिखाए कैसे रब ने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

मुझको बस इतना बतलाओ,

क्या हैं ये जीवन समझाओ,

अभी भी रातों को जागना,

बिना वजह फिर राह ताकना,

अब भी क्या वो शब्द तुम्हारे,

जिनसे खत थे रोशन सारे,

इतना निकला इतना बिता,

जीवन तुम बिन ऐसे रीता,

हम दोनो में जो होता था,

हर संवाद जीया हैं मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

देख पूराना कागज़ खत का,

आंख मेरी भर आईं  हैं अब,

वही पुराना सपना अपना,

आंखों के घेरो में हैं अब,

उगल सका ना निगल सका में,

सृष्टि का था खेल अनोखा,

मानो एक दिन में लिख डाला,

मेरे जीवन का लेखा जोखा,

तेरे तन पर मन दर्पण पर,

कुछ आघात किया क्या मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

कुछ तो जीवन का सार मिले अब,

जीने का आधार मिले अब,

सहते सहते थका बढ़ा हूँ,

खुशियो का संसार मिले अब,

झझोड़े है मुझको अब तो,

मेरे मन की उन्मुक्त वेदना,

मालूम मुझको तो सब पड़ता है,

पर ना चाहे अब मन ये समझना,

जीना तो तुम बिन भी चाहा,

पर पक्षघात किया हैं रब ने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया है मैंने।

 

© देवर्षि मेहता “जुगनू”

तुझसे मोहब्बत हो गई

जिस तरह रब की इबादत हो गई,

उस तरह तुझसे मोहब्बत हो गई।

 

इश्क़ मेरा एक तरफ़ा न रहा,

मैं दीवाना तू दीवानी हो गई।

 

याद कर कर के मैं तुझको जी रहा हूँ,

अपनी ये आदत पुरानी हो गई ।

 

वक़्त भरता हैं सदी के सौ जख्म,

अब तो वो बातें पुरानी हो गई।

 

प्यार का वो रंग था ऐसा चढ़ा,

आसमानी आसमानी हो गई।

 

मंजिलों की अब तरफ मैं बढ़ रहा हूँ,

जीते मरते ज़िन्दगानी हो गई।

 

ख्वाहिशे तो थी मुझे भी तब बहुत,

तब की ठोकर अब सयानी हो गई।

 

बहुत तड़पा हैं तू अपनी ज़िन्दगी में,

“जुगनू” तेरी इक कहानी हो गई ।

©Devershi Mehta “Jugnu”