क्या होगा? (Kya hoga)

अब इससे बड़ा जलजला क्या होगा,
अपने बिछड़ जाने का सिलसिला क्या होगा।

आओ बेठो कुछ बात करु मैं तुमसे,
मैं अकेला ही चला तो काफिला क्या होगा।

जिसके संग सोचा ही नही था ज़िन्दगी का एक भी पल,
अगर वो बिछड़ भी गया तो गिला क्या होगा।

आबाद कर के तो गई हैं मुझको मोहब्बत तेरी,
समझ नही आता मुझे छोड़ के उसे मिला क्या होगा।

© मेहता देवर्षि ‘जुगनू’

 

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तुझसे मोहब्बत हो गई

जिस तरह रब की इबादत हो गई,

उस तरह तुझसे मोहब्बत हो गई।

 

इश्क़ मेरा एक तरफ़ा न रहा,

मैं दीवाना तू दीवानी हो गई।

 

याद कर कर के मैं तुझको जी रहा हूँ,

अपनी ये आदत पुरानी हो गई ।

 

वक़्त भरता हैं सदी के सौ जख्म,

अब तो वो बातें पुरानी हो गई।

 

प्यार का वो रंग था ऐसा चढ़ा,

आसमानी आसमानी हो गई।

 

मंजिलों की अब तरफ मैं बढ़ रहा हूँ,

जीते मरते ज़िन्दगानी हो गई।

 

ख्वाहिशे तो थी मुझे भी तब बहुत,

तब की ठोकर अब सयानी हो गई।

 

बहुत तड़पा हैं तू अपनी ज़िन्दगी में,

“जुगनू” तेरी इक कहानी हो गई ।

©Devershi Mehta “Jugnu”