तुमको याद किया हैं मैंने (Tumko Yaad Kiya Hai Maine )

याद करो वो सावन के दिन,

याद करो एक दुझे के बिन,

एक पल नही चला करता था,

मावस हो या पूनम हर दिन,

जीवन नही कटा करता था,

अब इस क्षण विलक्षण तुम बिन,

तुमको बहुत जिया हैं मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

मेरी छोडो अपनी बतलाओ,

कुछ अपना संसार बताओ,

मुझसे अलग  रहकर  तुमने  क्या,

खुद अपना जीवन है  सवारा,

सांझ को मेरे गीत सुने क्या,

आंखों से क्या रुक गई धारा,

फिर भी आगे बढ़े हैं हम तुम,

बिना तुम्हारे व्यथित था ये मन,

इतना समय अब निकल चुका हैं,

रंग दिखाए कैसे रब ने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

मुझको बस इतना बतलाओ,

क्या हैं ये जीवन समझाओ,

अभी भी रातों को जागना,

बिना वजह फिर राह ताकना,

अब भी क्या वो शब्द तुम्हारे,

जिनसे खत थे रोशन सारे,

इतना निकला इतना बिता,

जीवन तुम बिन ऐसे रीता,

हम दोनो में जो होता था,

हर संवाद जीया हैं मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

देख पूराना कागज़ खत का,

आंख मेरी भर आईं  हैं अब,

वही पुराना सपना अपना,

आंखों के घेरो में हैं अब,

उगल सका ना निगल सका में,

सृष्टि का था खेल अनोखा,

मानो एक दिन में लिख डाला,

मेरे जीवन का लेखा जोखा,

तेरे तन पर मन दर्पण पर,

कुछ आघात किया क्या मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

 

कुछ तो जीवन का सार मिले अब,

जीने का आधार मिले अब,

सहते सहते थका बढ़ा हूँ,

खुशियो का संसार मिले अब,

झझोड़े है मुझको अब तो,

मेरे मन की उन्मुक्त वेदना,

मालूम मुझको तो सब पड़ता है,

पर ना चाहे अब मन ये समझना,

जीना तो तुम बिन भी चाहा,

पर पक्षघात किया हैं रब ने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया है मैंने।

 

© देवर्षि मेहता “जुगनू”

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